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लखनऊस्वास्थ्य

आई-क्यू आई हॉस्पिटल्स अपनी हैंस टैग आई ऑन द फ्यूचर अभियान के तहत लखनऊ में वंचित बच्चों का फ्री आई चेकअप किया

वर्ल्ड साइट डे के अवसर पर आई -Q की एक आई स्पेशलिस्ट टीम ने लखनऊ के मुंशी बाल गृह में वंचित बच्चों की आंखों की जांच की

लखनऊ: सम्वाददाता ::

देश के सबसे बड़े सुपर-स्पेशलिटी हॉस्पिटल में वर्ल्ड विश्व दृष्टि दिवस (World Sight Day) के अवसर बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक दिल को छू लेने

वाली एक पहल।संगठन ने लखनऊ के एक एनजीओ लीलावती मुंशी बाल गृह (अनाथ आश्रम) में वंचित बच्चों के लिए फ्री आई चेकअप का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य हैंसटैग आईऑन द फ्यूचर अभियान के तहत उन बड़ी बाधाओं को दूर करना था जिनका सामना कई गरीब बच्चों को आंखों की देखभाल सेवाओं को प्राप्त करने में करना पड़ता है।
अनाथ आश्रम (लिलावती मुंशी बाल गृह) जैसे अनाथालयों और वंचित समुदायों से आने वाले बच्चों की आंखों की नियमित जांच नहीं हो पाती है, जिससे उनमें दृष्टि समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। इससे बच्चों को रिफ्रैक्टिव एरर , एम्ब्लियोपिया , और स्ट्रैबिस्मस जैसी दृष्टि समस्याओं का ज्यादा जोखिम होता है। इन समस्याओं को नजरअंदाज किए जाने से बच्चों में उनकी
शिक्षा और विकास बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। इन चुनौतियों को पहचानते हुए आई-क्यू ने फैसला किया है कि इन बच्चों को आंखों से जुड़ी जरूरी देखभाल मिल सके। इस मौके पर आई-क्यू की एक आई स्पेशलिस्ट टीम ने बच्चों की आंखों की जांच की। आई-क्यू ने इस पहल के जरिए वर्ल्ड साइट डे की थीम लव योर आईज किड्स के तहत मुंशी बालगृह के 50 से अधिक बच्चों की आंखों की जांच की।


लखनऊ स्तिथ आई-क्यू के डिप्टी क्लिनिकल डायरेक्टर डॉक्टर बाबर प्रवेज़ ने कहा हर बच्चे का अधिकार है
कि वह दुनिया को स्पष्ट रूप से देखे और अपने अवसरों को पूरा करे। हमारी पहल के जरिए आंखों की देखभाल तक पहुंचने में आने वाली सभी बाधाओं को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। समस्या
का जल्दी पहचान करने से सही इलाज में मदद मिल सकती है और बच्चों की शिक्षा और आगे की जिंदगी को सफल बनाया जा सकता है। अगर दृष्टि समस्याओं का इलाज नहीं किया जाता है, तो इससे बच्चे के समग्र विकास पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे उसका आत्मविश्वास, सीखने की क्षमता और सामाजिक मेलजोल प्रभावित होते हैं। हमें विश्वास है कि आंखों से जुड़ी जरूरी देखभाल सेवाएं प्रदान करके हम इन बच्चों के लिए
एक उज्जवल भविष्य बना सकते हैं, जिससे उन्हें अपने संभावनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
इस पहल का असर साफ नजर आया क्योंकि कई बच्चों को पहली बार सुधारात्मक लेंस मिले, जिससे उनके सीखने और विकास के नए अवसर खुले। आई-क्यू जरूरतमंदों का समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे लोग जिन्हें दृष्टि से संबंधित समस्याओं के लिए ज्यादा सपोर्ट की जरूरत है, उन्हें पूरा सपोर्ट और स्थितियों के अनुसार व्यक्तिगत देखभाल मिल सके।
लीलावती मुंशी बाल ग्राम (अनाथ आश्रम) की श्रीमती माया हंस ने आई-क्यू के प्रयासों के लिए की। उन्होंने कहा इस पहल से हमारे बच्चों की जिंदगी बदल गई है। कई बच्चों ने पहले कभी आंखों की जांच नहीं करवाई थी।
आई-क्यू की वजह से उनके पास अब बेहतर दृष्टि के साथ एक उज्जवल भविष्य है। इस यह साझेदारी उनके विकास के लिए अमूल्य है। हम आई-क्यू के प्रति आभारी हैं जो हमारे बच्चों की भलाई को बढ़ाने के लिए समर्पित है, क्योंकि यह वास्तव में एक बेहतर कल की शुरुआत है।
साल 1956 में स्थापित लीलावती मुंशी बाल ग्राम वंचित बच्चों के लिए एक आश्रय स्थल के रूप में कार्य करता है। यहां रहने वाले बच्चों का शारीरिक, भावनात्मक और शैक्षिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जरूरी संसाधन मिलते हैं। इस एनजीओ का मिशन यहां रहने वाले बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और समर्थन देना है जिसके वे हकदार हैं।आई-क्यू का उद्देश्य आंखों की देखभाल सेवाओं को बेहतर बनाना इस आयोजन से कहीं अधिक बड़ा है। 17 से अधिक वर्षों की विरासत और 1 करोड़ से अधिक मरीजों का उपचार करने वाला आई-क्यू आउटरीच प्रोग्राम जैसे फ्री आई चेकअप कैंप, डोर टू डोर आई चेकअप और हेल्थ अवेयरनेस चला रहा है। आई-क्यू के वर्तमान में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और अन्य क्षेत्रों में 30 से अधिक सुपर-स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल हैं। आई-क्यू साल 2027 तक 7 नए अस्पताल स्थापित करने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।

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