
लखनऊ। ब्यूरो ::
डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली और इंटीग्रल विश्वविद्यालय के फार्मेसी संकाय ने संयुक्त रूप से ‘आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS)’ पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। 7 जनवरी, 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 60 प्रमुख फार्मेसी संस्थानों के डीन, निदेशकों और प्रधानाचार्यों ने हिस्सा लिया।
डिजिटल उपस्थिति से आएगी जवाबदेही
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में उपस्थिति प्रणाली को हाई-टेक बनाना और परिचालन संबंधी तकनीकी बाधाओं को दूर करना था। पीसीआई के उपाध्यक्ष जशुभाई हीराभाई चौधरी ने मुख्य वक्ता के रूप में जोर देते हुए कहा, “AEBAS केवल उपस्थिति दर्ज करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह परिणाम-आधारित शिक्षा सुनिश्चित करने और बाजार के लिए तैयार कुशल स्नातक तैयार करने की दिशा में एक अनिवार्य कदम है।”

विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी
पीसीआई की आईटी-चेयरमैन डॉ. पी. सथियामुर्ती और केंद्रीय परिषद सदस्य प्रो. आकाश वेद ने तकनीकी सत्रों का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि कैसे डिजिटल सिस्टम के माध्यम से फार्मेसी शिक्षा में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाया जा सकता है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष संदीप बदोला, रजिस्ट्रार डॉ. प्रमोद त्रिपाठी और ओएसडी रमेश चंद्रा की उपस्थिति ने इस पहल को मजबूत नियामक समर्थन प्रदान किया।
सफल रहा आयोजन
यह कार्यशाला इंटीग्रल विश्वविद्यालय के फार्मेसी संकाय के डीन प्रो. सैयद मिस्बाहुल हसन के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। आयोजन को सफल बनाने में प्रो. जुबेर अख्तर (विभागाध्यक्ष), प्रो. तारिक महमूद, डॉ. अरुण कुमार और प्रो. कुलदीप सिंह सहित पीसीआई की तकनीकी टीम का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम के अंत में एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न कॉलेजों से आए प्रतिनिधियों ने AEBAS के कार्यान्वयन से जुड़ी अपनी शंकाओं का समाधान किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा में उन्नत डिजिटल प्रणालियों को अपनाना समय की मांग है।




