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लखनऊ के अर्थशास्त्री डॉ. पी.सी. गुप्ता को मिला भारतीय डिज़ाइन पेटेंट, AI आधारित बिजनेस टूल किया विकसित

लखनऊ | सम्वाददाता::
​लखनऊ के सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री और महाकौशल विश्वविद्यालय (जबलपुर) के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. पी. सी. गुप्ता ने बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने उनके द्वारा विकसित एक नवाचारी उपकरण के लिए डिज़ाइन पंजीकरण प्रमाणपत्र (Indian Design Patent) प्रदान किया है।
​डॉ. गुप्ता का यह नवाचार “AI-Based Device for Business Strategy Planning and Risk Forecasting” शीर्षक से पंजीकृत किया गया है। यह उपलब्धि पंजीकरण डिज़ाइन अधिनियम, 2000  एवं डिज़ाइन नियम 2001 के अंतर्गत प्रदान की गई है, जो लखनऊ और उत्तर प्रदेश के शैक्षणिक जगत के लिए गौरव का विषय बनी है।

क्या है यह नवाचार?
​यह पेटेंट एक ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उपकरण से संबंधित है, जो व्यावसायिक जगत में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है। इस डिवाइस की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
​रणनीति निर्माण: व्यवसायों के लिए डेटा-आधारित सटीक रणनीति तैयार करना।
​जोखिम पूर्वानुमान: भविष्य के आर्थिक जोखिमों का पहले से विश्लेषण और पूर्वानुमान।
​वैज्ञानिक निर्णय: आधुनिक आर्थिक विश्लेषण के जरिए संस्थागत प्रबंधन को प्रभावी बनाना।

​पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिल चुकी है सराहना
​डॉ. पी. सी. गुप्ता केवल एक शोधकर्ता ही नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद भी हैं। उनकी अर्थशास्त्र पर लिखी गई पुस्तकों के लिए उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री और प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह से सराहना पत्र और मार्गदर्शन प्राप्त हो चुका है। डॉ. गुप्ता ने अपनी इस सफलता को शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के समन्वय का सुखद परिणाम बताया है।

​टीम वर्क की सफलता
​इस शोध और डिज़ाइन के विकास में डॉ. गुप्ता के साथ कई अन्य सह-आविष्कारकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस टीम में शामिल सदस्य हैं:
​डॉ. महेन्द्र कुमार नामदेव, डॉ. मुस्ताक आलम, पूजा उपाध्याय, डॉ. किरण सचदेवा, डॉ. श्वेता सिंह, सुमोना घोष, विशाल मिश्रा, अवधेश यादव एवं अपराजिता श्रीवास्तव।

​डॉ. पी. सी. गुप्ता का वक्तव्य:
“यह डिज़ाइन भविष्य में उद्योग, शिक्षा और नीति-निर्धारण के क्षेत्रों में रणनीतिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और सटीक बनाएगा। हमारा उद्देश्य तकनीक को अर्थशास्त्र के साथ जोड़कर जटिल व्यावसायिक समस्याओं का समाधान खोजना है।”
​इस उपलब्धि को शैक्षणिक और बौद्धिक जगत में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नवाचार भारत के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूती प्रदान करते हैं।

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