लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष सी.पी. सिंह को किया बर्खास्त, कुलपति को सौंपा निंदा प्रस्ताव

लखनऊ |सम्वाददाता::
लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आज परिषद कार्यालय में संपन्न हुई। इस बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन के हस्तक्षेप और संगठन विरोधी गतिविधियों को लेकर कई कड़े निर्णय लिए गए।
अनुशासनहीनता पर बड़ी कार्रवाई
परिषद की कार्यकारिणी ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष सी.पी. सिंह (मोनू) को अनुशासनहीनता, संगठन विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने और परिषद की नियमावली व उपनियमों का उल्लंघन करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से उनके पद और सदस्यता से बर्खास्त कर दिया है। उनके स्थान पर अभिषेक सिंह को वरिष्ठ उपाध्यक्ष का नया दायित्व सौंपा गया है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव
बैठक में कुलसचिव द्वारा कर्मचारी परिषद के संविधान के विपरीत जाकर कार्यकारिणी को भंग करने और चुनाव अधिकारी की अधिसूचना जारी करने के निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की गई। साथ ही, कुछ कर्मचारी नेताओं द्वारा पूर्व चुनाव अधिकारी डॉ. रविशंकर गुप्ता के विरुद्ध अपमानजनक शब्दों के प्रयोग पर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया।
आरोप: परिषद के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने, लोकतांत्रिक सिद्धांतों के हनन और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रस्ताव का समर्थन एवं क्रियान्वयन
प्रस्तावक: अध्यक्ष राकेश यादव।
अनुमोदक: उपाध्यक्ष अभिषेक सिंह एवं महामंत्री संजय शुक्ला।
समर्थन: बैठक में मंत्री बाबूलाल, दिनेश वाल्मीकि, के.पी. सिंह, कोषाध्यक्ष अमित कु. सक्सेना, संगठन मंत्री शिवानन्द द्विवेदी समेत कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने इस निर्णय का पूर्ण समर्थन किया।
उच्चाधिकारियों को दी गई सूचना
बैठक के पश्चात अध्यक्ष राकेश यादव और महामंत्री संजय शुक्ला के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात कर उन्हें पारित प्रस्ताव की प्रति सौंपी। इसके अतिरिक्त, मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रस्ताव की प्रतियां जिलाधिकारी (लखनऊ), अपर श्रमायुक्त, तथा भारतीय मजदूर संघ (U.P.) के अध्यक्ष व महामंत्री को भी उचित कार्यवाही हेतु प्रेषित कर दी गई हैं।



