इंटीग्रल विश्वविद्यालय में काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (COA) थीसिस अवार्ड 2025, का भव्य उद्घाटन

लखनऊ :सम्वाददाता::
इंटीग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ में आज काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (COA) थीसिस अवार्ड 2025, जोन 1 का भव्य उद्घाटन किया गया। यह आयोजन वास्तुकला क्षेत्र में नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता का तीन दिवसीय उत्सव शुरू करता है।
इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थापक एवं चांसलर प्रो. सैयद वसीम अख्तर और मैडम चांसलर प्रो. अज़रा वसीम ने किया। साथ ही प्रो-चांसलर डॉ. सैयद नदीम अख्तर, अतिरिक्त प्रो-चांसलर सैयद अदनान अख्तर एवं सैयद मोहम्मद फौज़ान अख्तर, कुलपति प्रो. जावेद मुसर्रत, रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) मोहम्मद हारिस सिद्दीकी और वास्तुकला, योजना और डिजाइन संकाय की डीन प्रो. जेबा निसार सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
उद्घाटन समारोह में प्रमुख वास्तुकार और शिक्षाविदों जैसे अर. विशाल माथुर (राष्ट्रपति, YAA), अर. प्रशांत पाल सिंह (राष्ट्रपति, लखनऊ आर्किटेक्ट्स असोसिएशन), अर. संदीप सरस्वत (राष्ट्रपति, IIA), अर. सुनील श्रीवास्तव (प्राचार्य, ITM), अर. देवेश मणि त्रिपाठी, अर. गौरव गुप्ता और अर. प्रसंजित सान्याल भी उपस्थित थे। उन्होंने COA थीसिस अवार्ड की सराहना की, जो युवा वास्तुकला प्रतिभा को संवारने और प्रदर्शित करने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करता है।

कार्यक्रम के दौरान उत्तर भारत के विभिन्न छात्रों के बेहतरीन थीसिस कार्यों की प्रदर्शनी का भी शुभारंभ हुआ, जिसमें स्थिरता, शहरी लचीलापन, जीवनयोग्यता और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे आधुनिक विषयों पर काम को प्रदर्शित किया गया। साथ ही, JK AYA बेस्ट आर्किटेक्चर स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2025 पुरस्कार की घोषणा भी की गई।
यह पुरस्कार कार्यक्रम भारत के नवोदित वास्तुकारों के लिए एक प्रतिष्ठित मंच है, जहां शैक्षणिक प्रतिभा और व्यावसायिक दृष्टिकोण मिलते हैं। तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान आयोजन में उद्योग जगत के प्रमुख प्रायोजकों और सहयोगियों का भी विशेष योगदान रहा, जिन्होंने अकादमिक और व्यावसायिक क्षेत्र के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने में मदद की।
इंटीग्रल विश्वविद्यालय के FOAPD संकाय और स्टाफ ने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में अहम भूमिका निभाई। उद्घाटन के बाद संवाद और अनौपचारिक चर्चाएं हुईं, जिससे आगामी सत्रों के लिए सकारात्मक माहौल बना।
इस प्रकार COA थीसिस अवार्ड 2025 का उद्घाटन लखनऊ में एक नई उम्मीद और प्रेरणा के साथ हुआ, जो भारतीय वास्तुकला के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।




