लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर जागरूकता अभियान शुरू; हस्ताक्षर अभियान से एकजुट हुआ परिसर

लखनऊ: सम्वाददाता::
लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) में आज ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ के समर्थन और इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक व्यापक जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा एवं मुख्य छात्रावास अभिरक्षक प्रो. आशीष अवस्थी द्वारा की गई।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के डॉ. संजय शुक्ला और लेखाधिकारी अंतरा बनर्जी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। अभियान के दौरान परिसर में व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिसमें शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

सशक्त नारी से ही बनेगा सशक्तभारत
कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा ने संबोधित करते हुए कहा कि, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि ‘सशक्त नारी, सशक्त भारत’ के सपने को साकार करने का सशक्त माध्यम है। जब महिलाएं निर्णय लेने वाली संस्थाओं (विधायिका) का हिस्सा बनेंगी, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्रों में बुनियादी और गुणात्मक सुधार देखने को मिलेंगे।”

ऐतिहासिक भागीदारी का मार्ग प्रशस्त
डॉ. संजय शुक्ला ने अधिनियम की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें आरक्षित होने से महिलाओं को ऐतिहासिक राजनीतिक भागीदारी मिलेगी। यह कानून भारत के लोकतंत्र को अधिक समावेशी और गौरवशाली बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
अभियान के पहले ही दिन विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों में भारी उत्साह देखने को मिला।



