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लखनऊ में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और सेग्रीगेशन के दावे जमीनी हकीकत से दूर, स्मार्ट सिटी योजना पूरी तरह फेल: मुकेश सिंह चौहान

बुकलेट में दावों की सच्चाई 100% झूठ, GIS सर्वे के नाम पर जनता की जेब पर डाला डाका’

​लखनऊ:सम्वाददाता::

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में महापौर के 3 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर जारी की गई बुकलेट और आयोजित कार्यक्रम को कांग्रेस पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष एवं इस्माइलगंज प्रथम वार्ड के पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने जनता के साथ छलावा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने इवेंट के नाम पर जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए बर्बाद किए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं।

​पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने नगर निगम प्रशासन और भाजपा नेताओं को घेरते हुए 7 मुख्य बिंदुओं के जरिए बुकलेट के दावों की पोल खोली:

🚨 नगर निगम की विफलता के 7 बड़े प्रमाण: मुकेश सिंह चौहान

​1. डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और सेग्रीगेशन का दावा हवा-हवाई:
बुकलेट में 100% कूड़ा कलेक्शन और 97% गीला-सूखा कूड़ा अलग (सेग्रीगेशन) करने का दावा पूरी तरह झूठा है। हकीकत यह है कि लखनऊ के 110 वार्डों में प्रतिदिन कूड़ा नहीं उठ रहा है, औसतन 3 दिन में एक बार उठान हो रहा है। मुश्किल से 10% कूड़ा भी अलग नहीं किया जा रहा।

​2. GIS सर्वे के नाम पर टैक्स की बेतहाशा बढ़ोतरी और भ्रष्टाचार:
भाजपा की स्थानीय सरकार ने गृहकर (House Tax) की दरों में बिना सीधी वृद्धि किए, चालाकी से GIS सर्वे के नाम पर जनता पर भारी टैक्स थोप दिया है। गलत तरीके से बढ़ाए गए टैक्स के कारण जनता नगर निगम के चक्कर काटने को मजबूर है, जिससे भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है। नगर निगम के ‘समाधान दिवस’ में सबसे ज्यादा शिकायतें गृहकर की गड़बड़ियों की ही आ रही हैं।

​3. खुले में कूड़े के ढेर, काम्पैक्टर स्टेशन अधूरे:
बीते तीन वर्षों में पूरे शहर में पोर्टेबल काम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन नहीं लग पाए हैं। आज भी लखनऊ में खुले स्थानों पर कूड़ा फेंका जा रहा है और जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं।

​4. शोपीस बने ‘पिंक टॉयलेट’:
शहर में महिलाओं के लिए बनाए गए पिंक टॉयलेट ‘हाथी के दांत’ साबित हो रहे हैं। इन टॉयलेट्स में ताले लटके रहते हैं, जिससे महिलाओं को कोई सुविधा नहीं मिल रही।

​5. स्मार्ट सिटी योजना बुरी तरह फ्लॉप:
केंद्र सरकार को स्मार्ट सिटी योजना बंद करनी पड़ी क्योंकि यह पूरी तरह फेल रही। पुराने लखनऊ के जिन वार्डों को इसमें शामिल किया गया था, उनकी स्थिति सुधारने के बजाय पहले से भी बदतर हो गई है।

​6. LED लाइटों का झूठा श्रेय:
साल 2017 में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान ही सोडियम लाइटों की जगह LED लाइटें लगाने का फैसला हुआ था। वर्तमान बुकलेट में इसका श्रेय लेना पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।

​7. गृहकर (House Tax) में छूट की अवधि घटाई, जनता को नुकसान:
पहले भवन स्वामियों को 31 जुलाई तक गृहकर जमा करने पर 10% की छूट मिलती थी। नगर निगम ने इसे घटाकर सिर्फ अप्रैल माह तक सीमित कर दिया है, जो जनता के साथ सीधे तौर पर धोखा है।

💬 “जनता से माफी मांगें भाजपा नेता, महापौर हर मोर्चे पर विफल”
​”प्रधानमंत्री जी मंचों से फिजूलखर्ची रोकने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन उनकी ही पार्टी के नेता इवेंट्स में जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए बर्बाद कर रहे हैं। अगर यह पैसा जनता के विकास कार्यों में लगता तो बेहतर होता। GIS सर्वे के नाम पर लखनऊ की जनता का जो उत्पीड़न हुआ है, उसके लिए भाजपा नेताओं को माफी मांगनी चाहिए। जनता ने बड़ी उम्मीदों से महापौर को चुना था, लेकिन वह जनहित के कार्यों में पूरी तरह विफल रही हैं।”


मुकेश सिंह चौहान (पार्षद, इस्माइलगंज प्रथम वार्ड, लखनऊ)

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