लखनऊ में छठा ताइक्वांडो हॉल ऑफ फेम सम्पन्न, खिलाड़ियों और गुरुओं को मिला सम्मान

लखनऊ : सम्वाददाता::
भारत में ताइक्वांडो के 49 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा को समर्पित छठे ताइक्वांडो हॉल ऑफ फेम का भव्य आयोजन आज राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित हलवासिया कोर्ट, हज़रतगंज में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर ताइक्वांडो को जीवन का मार्ग बनाने वाले देश भर के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, मास्टर्स और ग्रैंडमास्टर्स को सम्मानित किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन के सूत्रधार और आयोजक थे डॉ. जी.एम. जिमी आर. जगतियानी, जिन्हें भारत में ताइक्वांडो का संस्थापक और जनक माना जाता है। ताइक्वांडो को भारत में लाने और उसके प्रचार-प्रसार में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने ही 49 वर्ष पूर्व इस मार्शल आर्ट को भारतीय धरती पर स्थापित किया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे सदस्य विधान परिषद तथा ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट पवन सिंह चौहान जिन्होंने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि ताइक्वांडो जैसे खेलों को बढ़ावा देकर युवाओं में अनुशासन, आत्मरक्षा और आत्मबल की भावना विकसित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार खेलों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है और ऐसे आयोजनों को हरसंभव सहयोग देगी। इस आयोजन में उन विभूतियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने ताइक्वांडो के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। सम्मान प्राप्त करने वालों को डिप्लोमा, योग्यता प्रमाण पत्र, विशेष पदक और टाई प्रदान की गई। इसमें राष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी, आजीवन उपलब्धि पुरस्कार / ताइक्वांडो के अग्रदूत / प्रवर्तक, वरिष्ठ मास्टर प्रशिक्षक, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, मास्टर और ग्रैंडमास्टर श्रेणियों में सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष का प्रतीक था बल्कि पूरे ताइक्वांडो समुदाय की साझा उपलब्धि भी। इस अवसर पर डॉ. जी.एम. जिमी आर. जगतियानी ने बताया कि 1975 से शुरू हुई यह यात्रा आज उस मुकाम पर पहुँच चुकी है जहाँ भारत में लाखों युवा ताइक्वांडो से सीधे जुड़े हैं। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में यह अब नियमित खेल के रूप में स्थापित हो चुका है तथा यह आयोजन केवल सम्मान समारोह नहीं बल्कि ताइक्वांडो बिरादरी का उत्सव है। हम आने वाले वर्ष 2026 में इसकी 50वीं वर्षगांठ को स्वर्ण जयंती के रूप में और भव्य रूप से मनाएंगे छठा ताइक्वांडो हॉल ऑफ फेम भारतीय ताइक्वांडो के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जोड़ने वाला आयोजन सिद्ध हुआ। यह न केवल पुराने योद्धाओं को सम्मान देने का मंच बना, बल्कि नई पीढ़ी को ताइक्वांडो को अपनाने की प्रेरणा भी प्रदान कर गया।




