ईद-उल-अजहा की खुशियों को साझा करने के लिए अलफारूक बैतुलमाल की पहल
मदरसा शाकिरा लिलबनात में जरूरतमंद परिवारों को कपड़ों का वितरण, मानव सेवा और आपसी भाईचारे पर दिया गया जोर

मेंहदावल, संत कबीर नगर: सम्वाददाता::
ईद-उल-अजहा के पावन अवसर पर जरूरतमंद और गरीब परिवारों की खुशियों को बढ़ाने के उद्देश्य से अलफारूक बैतुलमाल दरियाबाद की ओर से मदरसा शाकिरा लिलबनात धुबहा सांथा में एक सम्मानजनक सामाजिक एवं सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवारों के बीच नए कपड़ों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य लोग, उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा मदरसा प्रबंधन के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर ईद की खुशियां साफ दिखाई दीं और लोगों ने इस मानवीय पहल की सराहना की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना नूरुल हुदा कासमी ने कहा कि इंसानियत की सेवा और जरूरतमंदों की सहायता इस्लामी शिक्षाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जब भी देश या प्रदेश में बाढ़, प्राकृतिक आपदा या किसी प्रकार की विपत्ति आती है, तब अलफारूक बैतुलमाल की ओर से पीड़ित लोगों तक हर संभव राहत पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि संस्था बिना किसी धर्म या जाति के भेदभाव के मानवता की सेवा के लिए कार्य करती है और हर जरूरतमंद की मदद को अपना कर्तव्य समझती है।
उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक तरक्की तभी संभव है जब लोग दूसरों के दुख-दर्द को अपना समझें। हमारा उद्देश्य केवल सहायता सामग्री बांटना नहीं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग, भाईचारे और इंसानियत की भावना को मजबूत करना भी है। उन्होंने कहा कि देश की खुशहाली उसी में है कि समाज के सबसे कमजोर और गरीब वर्गों की जरूरतें पूरी हों, और यह तभी संभव है जब सभी लोग मिलकर एक-दूसरे का सहयोग करें।
उन्होंने आगे कहा कि यह दुनिया आपसी सहयोग और सहारे पर चलती है, इसलिए लोगों को एक-दूसरे को नीचे गिराने के बजाय आगे बढ़ाने और हौसला बढ़ाने का काम करना चाहिए। यदि समाज के लोग एक-दूसरे के सहायक बन जाएं तो अनेक समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं।
इस अवसर पर मौलाना रहमतुल्लाह नूर कासमी ने कहा कि ये सभी सामाजिक और सेवा कार्य केवल अल्लाह की रज़ा और मानवता की भलाई के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों की सहायता करने से समाज में प्रेम, विश्वास और आपसी सद्भाव बढ़ता है तथा लोगों के बीच दूरी कम होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं और सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
कार्यक्रम का संचालन मौलाना हफीजुर्रहमान कासमी ने किया, जबकि अंत में मौलाना इस्लाम कासमी ने देश की खुशहाली, आपसी भाईचारे, शांति और मानवता की भलाई के लिए दुआ की।
अंत में मदरसा शाकिरा लिलबनात के नाज़िम-ए-आला अब्दुल बाकी नदवी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी सम्मानित अतिथियों, उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उपस्थित लोगों का दिल की गहराइयों से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक और सेवा कार्यों की सफलता आपसी सहयोग, ईमानदारी और नेक भावना पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि लोग मानव सेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने अलफारूक बैतुलमाल की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि जरूरतमंदों की सहायता करना एक महान सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला सभी सहयोग करने वालों, समाजसेवियों और मानवता की सेवा में लगे लोगों को अपनी विशेष रहमतों से नवाज़े तथा समाज में भाईचारा, प्रेम और खुशहाली कायम रखे।



